भई किसी
जमाने में जमाना इत्ता खराब रहिस की पंकज उधास रेडियो पर बेनकाब नहीं निकलन की
नसीहत देत रहे औऱ अब जमाना इत्ता खराब से कि नकाब उतारे के भी कालिख पोती जा रही
है भई सबका रुआब खतरे में सै..टीवी पर कीचड ही फीचर है..अरे आम आदमी ने पार्टी बना
ली तो सारे खास आदमी की सूरत औऱ सीरत खतरे में पडरइस है...सुना है आम आदमी अपनी
झाडू में कीचड लपेटे घूम रहे हैं..जब से कुछ खास आदमी के मुंह पर कीचड भरी झाडू
पडी है..तब से सारे खास आदमी सतर्क है औऱ आम आदमी से खुन्नस निकालने की ताड में
हैं..सब ने अपनी अपनी जेब तक में कीचड भर रखा है..जब जरुरत पड रही है निकाल कर
दूसरे के मुंह पे पोत दे रहे है.. अन्ना जान गये थे कि कीचड होली खेली जानी है सो
अबकी वो अनशन करने दिल्ली नहीं आये बल्कि रालेगान सिद्धी में ही बिस्तर लगा
लिया..पोलिंग का पोल अब खुल चुका है..कहते हैं कि कीचड में कमल खिलेगा....सब कुछ
टम्प्रैरी लग रहा है बस परमानेंट है तो बस कीचड.. हर कोने में पीक है, बाकी सब ठीक है.
जहां भी सफाई है, अस्थाई है.कीचड परमानेंट है स्थाई है..कई तो पहले से ही कीचड
में सने घूम रहे थे उन्हे थोडी कम दिक्कत है लेकिन वो लोग खासे परेशान है जो कीचड
देख कर रास्ता बदल देते थे..लेकिन इस बार तो जिस रास्ते जा रहे हैं वही पर कोई न
कोई मिल जा रहा है नहलाने के लिए..बाल्टी भर कीचड लिए...सो इस बार कीचड से अपने
दामन को बचाना मुस्किल लग रहा है..
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