मैं अमेठी हूं,पहले मैं सुल्तानपुर जिले की एक तहसील था पर कालांतर में
मेरा इतिहास औऱ भूगोल बदल दिया गया। मेरा नाम दो बार बदला गया औऱ आज मैं अमेठी
नहीं छत्रपति शाहू जी महराज के नाम से एक जिले के रुप में जाना जाता हूं। पर ना
जाने क्यों मेरा मन अमेठी मे ही बसता है। मैं संसदीय क्षेत्र के रुप मे अमेठी ही
हूं। आजादी के बाद से ही मैं नेहरु-गॉधी परिवार का चहेता रहा हूं। 1980 से मेरा
प्रतिनिधित्व इसी परिवार के हाथों में है। मैंने आधुनिक भारत के निर्माता कहे जाने
वाले औऱ सूचना क्रांति के जनक राजीव गांधी के रुप में देश को एक दूरदर्शी
प्रधानमंत्री दिया। मैं उस वक्त चर्चा मे आया जब कांग्रेस के छोटे सरकार कहे जाने
वाले संजय गांधी ने लोकसभा में जाने के लिए मुझे चुना। तभी से मेरा नाम गांधी
नेहरु परिवार के नाम से जुड गया। आज भी कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी लोक सभा
में मेरा ही प्रतिनिधित्व करते हैं।
गांधी परिवार के चार सदस्य मेरे क्षेत्र से चुनाव लड चुके हैं औऱ मेरी
जनता ने उन्हें लोकसभा तक पहुचाया है। जवाहर लाल नेहरु के पिता औऱ इंदिरा गांधी के
दादा मोती लाला नेहरु ने अपनी वकालत की शुरुआत यहीं से की थी। आज मैं भले ही गांधी
परिवार का चहेता हूं , लेकिन उस हिसाब से मेरा विकास नहीं हो पाया है। इस बार विकास औऱ प्रगति की बहुत सी उम्मीदे मैने
सजा रखी हैं ।
उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों की भांति मेरी आर्थिक प्रगति कृषि पर
आधारित है। परंतु दुख इस बात का है कि देश के सबसे बडे घराने के इतना करीब होने के
बावजूद मेरे किसान भाइयों की हालत में कोई सुधार नहीं आया है। किसानो को समय पर
खाद औऱ बीज नहीं मिल पाता तो सिंचाई सुविधा के अभाव में उन्हें मजबूरन खेती से
मुंह मोडना पड रहा है।
यूं तो मेरे यहां कल कारखाने खोलने के कई वायदे कई सालों से हो रहे
हैं। लेकिन आज भी रोजगार के मामले में भी मैं फिसड्डी साबित हो रहा हूं। रोजगार के
लिये यहॉ के युवाओं अन्यत्र पलायन करना पड रहा है।
शिक्षा को बढावा देने के लिये कई घोषणायें भी हुयी हैं। कांग्रेस
महासचिव राहुल गांधी ने यहां पर आईआईटी समेत कई उच्च शिक्षण संस्थान स्थापित करने
के वायदे किये हैं, पर अब तलक उन्हें अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है। देश के
मानचित्र पर गर्व से अपना सिर उठाये मैं अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा हूं सिर्फ इस
वजह से कि राहुल गॉधी को रुप में मैंने वह जन प्रतिनिधि पाया है जो संसद में मेरा
प्रतिनिधित्व करता है,पर कभी-कभी मुझे लगता है कि बस दिल को बहलाने का यह ख्याल
अच्छा है। इस बार उम्मीद के दिये फिर जले हैं..कुछ लोग मेरी धरती पर आये हैं..जिन्होंने मेरी तस्वीर बदलने का वादा किया है..देखता हूं क्या होगा मेरा।
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